Tuesday, 2 August 2016

नीम – गांव का दवाखाना और लाख दुखों की एक दवा

नीम भारतीय पर्यावरण के अनुकूल एक बहुत ही अच्छी वनस्पति है। इसका स्वाद कड़वा होता है पर यह बहुत गुणकारी है। नीम में मौजूद गुणों के चलते इसे भारत में ‘गांव का दवाखाना’भी कहा जाता है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’यानि ‘श्रेष्ठ और कभी खराब न होने वाला’कहा गया है। नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटीज, बैक्टिरिया और वायरस से लडऩे के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लडऩे का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है। आयुर्वेद के आधार-स्तंभ ‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ में नीम को लाख दुखों की एक दवा कहा गया है।

नीम के स्वास्थ्य लाभ और फायदे - Neem ke fayde, labh in Hindi

स्किन इन्फेक्शन या त्वचा रोगों से बचाव:
नीम की पतियों और इसकी छाल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी फंगल तत्व पाए जाते हैं जो आपके शारीर के चर्म रोगों और घावों को रोकने में सहायक होते हैं! इसका सब से बड़ा फायदा ये होता है के आपके त्वचा पे किसी प्रकार का बुरा प्रभाव नहीं डालता! इसे सभी तरह की त्वचा वाले व्यक्ति प्रयोग कर सकते हैं! नीम के पत्तों को पानी में काफी देर तक उबाल कर और नहाने के पानी में मिलाकर नहाने से इस तरह के रोगों से आपको लाभ मिलेगा

नीम के फायदे व् औषधी गुण, Neem ke fayde in hindi, Neem Leaves Benefits

शरीर के जटिल रोगों में नीम का उपयोग:
नीम की छाल का लेप सभी प्रकार के चर्म रोगों दूर करता है। नीम की पत्तियां चबाने से खून साफ होता है और त्वचा कांतिवान होती है। नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर नहाने से त्वचा रोग नहीं होते है। यदि नीम का तेल न हो तो जले हुए या कटे हुए स्थान पर नीम की पत्तियां पीस कर लेप लगा ले, इस से भी काफी लाभ होगा!

घाव, फोड़े-फुंसी, बदगांठ, लू एवं विष उतारने में नीम उपयोगी:
घाव और चर्म रोग बैक्टिरिया से फैलते हैं। नीम अपने बैक्टेरिया रोधी गुणों के कारण राम वाण औषधि का काम करता है। घाव चाहे छोटा हो या बड़ा नीम की पत्तियों के उबले जल से धोने से शीघ्र लाभ होता है। फोड़े-फुंसी और बाल तोड़ में भी नीम पत्तियां पीस कर लगाई जाती हैं। घमोरियां निकलने पर नीम पत्ते के उबले जल से नहाने पर लाभ होता है। बिच्छू तथा मधुमक्खी के काटने पर नीम की पत्तियों का रस, सरसों का तेल और पानी, में पका कर लगाने से विषैले घाव भी ठीक हो जाते हैं। नीम की पत्ती को पीस कर माथे पर लगाने से भी लू का असर कम होता है।

आंख, नाक, कान, बीमारियों में नीम उपयोगी:
आंख में जलन या दर्द हो तो नीम की पत्ती को कनपटी पर बांधने से आराम मिलता है। नीम का तेल गर्म कर एवं थोड़ा ठंडा कर कान में कुछ दिन तक नियमित डालने से बहरा पन दूर होता है। नीम की पत्तियां एवं अजवाइन पीस कर कन पट्टियों पर लेप करने से नकसीर बंद होती है।

वायु, कफ, पित्त, दमा, रक्त, हृदय विकार और पथरी में नीम:
नीम और वक के छाल का काढ़ा वायु, कफ, पित्त, दमा, रक्त और हृदय संबंधी विकार और पथरी में लाभ दायक है। नीम की कोमल पत्तियां, पत्ते, जड़, फूल, फल एवं छाल का काढ़ा इनमें से किसी का भी सेवन करने से फायदा मिलता है। नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला है। नीम की पत्तियों की राख को जल के साथ नियमित रूप से लेने पर पथरी गल कर नष्ट हो जाती है।

Tuesday, 19 July 2016

दांतों की बीमारियां और कारण

पीलेपन से शुरू होकर आपके दांत अकसर कैविटी (कीड़ा लगना), पाइरिया (मसूड़ों से खून आना), मुंह से बदबू और दांतों में ठंडा-गर्म लगने जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इन बीमारियों से दांतों की देखभाल और बचाव अगर समय रहते न किया जाए तो आपके चेहरे की खूबसूरती के साथ-साथ मुंह का जायका भी गायब हो जाता है। दांतों के बिना जिंदगी कितनी मुश्किल हो सकती है, यह केवल वही जान सकता है जो यह समस्या झेली हो। सब से बड़ी दिक्कत यह है कि भारत में ज्यादातर लोग दांतों की देखभाल को गंभीरता से नहीं लेते। अगर शुरू में ही समय पर ध्यान दिया जाए और कुछ एहतियात बरती जाए तो दांतों की बहुत सारी बीमारियों से बचा जा सकता है।

दांतों की बीमारियां और कारण

मौजूदा लाइफ स्टाइल दांतों की बीमारियों को न्योता

मौजूदा दौर में दुनिया भर में करीब 90 फीसदी लोग दांतों से जुड़ी किसी न किसी बीमारी से त्रस्त हैं। और जब खाना ही मुश्किल हो जाए या कोई आपको मुंह या मसूड़ों की बदबू के कारण सरेआम टोक दे तो आप डेंटिस्ट के पास हो लेते हैं। हालांकि, थोड़ी सी एहतियात और कुछ परहेज आपको दांतों की बीमारियों से बचाने में मददगार हो सकते हैं। वर्तमान शहरी लाइफ स्टाइल, देर रात तक पार्टी, धूम्रपान, शराब और चिकनाई युक्त भोजन और उसके बाद दांतों को ब्रश न करने से दांतों की सेहत बिगड़ रही है।

बचपन, जवानी या बुढ़ापा दांतों की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। हालांकि, बचपन में चॉकलेट, टॉफीया ज्यादा मीठा खाने वाले बच्चों और युवाओं के दांत खराब होने का ज्यादा खतरा रहता है। वहीं, 35 वर्ष की उम्र के बाद दांत और मसूड़ों की बीमारी आम है। इससे बचने के लिए दांतों की देखभाल की जानकारी होनी चाहिए। प्रोटीन और विटामिन युक्त भोजन करने से दांत, मसूड़ों की बीमारी कम होती है। शरीर में प्रोटीन की कमी से दांत, मसूड़ों की बीमारी से होने का खतरा ज्यादा रहता है।

दांतों की बीमारियां - Danto ki bimari – Teeth problems hindi

- अगर मसूड़ों से रोजाना ब्रश करते हुए या खाना खाने के बाद खून बहे तो यह पाइरिया हो सकता है। इस बीमारी में मसूड़े सडऩे और पीले पडऩे लगते हैं। दांतों की ठीक ढंग से सफाई न करना पाइरिया का प्रमुख कारण है।
- मसूड़ों से खून आना दांतों की सबसे आम बीमारी है। दांतों की उचित सफाई न होने से दांत पर पत्थर (टारटर) जम जाता है। इससे मसूड़ों में सूजन आ जाती है और वे लाल हो जाते हैं। ऐसे मसूड़ों को ब्रश करने से या छूने भर से ही खून आने लगता है।
- ज्यादा मीठा, चॉकलेट, टॉफी या मिठाई आदि खाने और फिर दांतों की उचित देखभाल और ब्रश आदि न करने से दांतों में कैविटी हो जाती है। दांतों में कैविटी होने पर डेंटिस्ट के पास जाकर फिलिंग, स्केलिंग या आरसीटी तक कराने पर हजारों रुपये फूंकने पड़ते हैं।
- मसूड़ों में बीमारियां लगने से दांत कमजोर होते हैं। इसके चलते दांतों में ठंडा या गर्म कुछ भी खाने पर उन में दर्द होना शुरू हो जाता है। कई बार तो मुंह खोलने पर हवा भी दांतों में दर्द करती है। इस बीमारी को हल्के में न लें।

Thursday, 7 July 2016

कई बिमारियों का इलाज है गुणकारी संतरा

संतरा अन्य सभी फलों से भी भिन्न होता है क्योकि इसमें विशेष रूप से विटामिन – सी की अधिक मात्रा होती है और सबसे कम मात्रा में कैलोरी होती है और साथ ही कोई भी वसा, कोलेस्ट्रॉल या सोडियम नहीं होता! यही कारण है चाहे फल के रूप में या जूस के रूप में ये ज्यादातर लोगो का पसंदीदा फ्रूट है! संतरा खाने से अनेक लाभ होते है और यह हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और ये हमारी त्वचा के लिए भी बहुत लाभकारी होता है!

कई बिमारियों का इलाज है गुणकारी संतरा


Orange ke fayde - Santre ke labh

  1. संतरा दांतो के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह मसूड़ों और दांतों की बीमारी को भी खत्म करता है।
  2. शहद में संतरे का रस को मिलाकर पीने से दिल के रोगी को बेहद फायदा होता है।
  3. बुखार होने पर संतरे के जूस का सेवन करने से शरीर का बढ़ा हुआ तापमान कम होता है। यह गुर्दों के रोग को भी दूर करता है।
  4. अपच, जोडों का दर्द और पेट में गैस की समस्या को दूर करने के लिए संतरे का जूस पीएं।
  5. संतरा बवासीर जैसे पीड़ादायक रोग में भी लाभ देता है जो खून को बहने से रोकता है।
  6. संतरे के नियमिन सेवन से से हड्डी और दांत के स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है क्योकि इसमें विटामिन ए और कैल्शियम से भरपूर होता है।
  7. संतरा के नियमिन सेवन से कुछ हद तक ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम में भी सहायक है।
  8. संतरा में फाइबर के अच्छे स्रोत होने से ही चीनी को फ्रूटोस में बदलने से और चीनी के स्तर को नियंत्रित करके मधुमेह से पीडित व्यक्ति के लिए अच्छा पेय पदार्थ माना जाता है।
  9. उल्टियाँ आना जी मचलाना में संतरे के रस में थोड़ी सी काली मिर्च और काला नमक मिलाकर लिया जाना लाभकारी रहता है।
  10. संतरे में मौजूद पोटेशियम व फोलिक एसिड, कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल के स्तर तथा उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।
  11. संतरा हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के मात्रा को कंट्रोल या कम करने में सहायक होता है! इसमें फाइबर पाया जाता है जो ज्यादा कोलेस्ट्रॉल को सोख्ता है।
  12. संतरा हाई ब्लड प्रेशर -उच्च रक्त चाप (High-BP) के रोगियों के लिए भी अद्भुत काम करता है! इसमें पाया जाने वाला पोटाशियम और मैग्नीशियम शरीर के उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है।
  13. संतरे में पाया जाने वाला फाइबर, विटामिन-सी चेहरे के बहुत अच्छा माना जाता है! न केवल ये झुर्रियों को रोकने में मदद करता है पर साथ ही आपकी त्वचा को ख़राब होने से बचाता है।
  14. विटामिन-सी, फाइबर और इसमें पाया जाने वाला पोटाशियम हमारे ह्रदय/दिल के बहुत लाभकारी होता है। ये सभी हमारे दिल को सुचारु से काम करने में सहायता करते हैं।
  15. संतरा एक ऐसा फल है जिसमे वसा (Fat) बहुत कम मात्रा में होता है जिससे इसका सेवन मोटापा या वसा को नहीं बढ़ने देता।

Thursday, 23 June 2016

गोरी और चमकती त्वचा पाने के कुछ घरेलू तरीके - Home Remedies for Glowing skin in Hindi

चमकती त्वचा हर व्यक्ति को आकर्षित करती है हर बच्चा एक चमकती त्वचा लेकर पैदा होता है और यह उनके माता  पिता के ऊपर निर्भर करता है लेकिन समय के साथ साथ त्वचा का रंग भी बदलता रहता है धूल और प्रदूषण के दुष्प्रभाव से त्वचा भी नहीं बच पाया है। क्योंकि त्वचा के ऊपर इन सबका जो परत जम जाता है उससे चेहरे की रंगत खो जाती है। आज कल बाजार मैं बहुत सी क्रीम ऐसे भी है जो तुरंत आप को गोरा कर देगी हालांकि इनके दुष्प्रभाव (side effects) भी होते है यदि आप हमेशा चमकती त्वचा चाहते है तो त्वचा की देख रख के लिए प्राकृतिक उपचार अपनाए जिसका कोई दुष्प्रभाव (side effects) भी नहीं होता है।


gora hone ke upay in hindi

गोरी त्वचा पाने के घरेलु नुस्खे - gora hone ke upay in hindi

  1. हल्दी में जो करक्यूमिन नाम का यौगिक होता है वह त्वचा के दाग-धब्बों को कम करके त्वचा के ऊपर एक सुरक्षा कवच जैसा बना देता है और दूध स्किन टोन को निखारता है
  2. बेसन को एक तरह से औषधि के रूप में भी प्रोयग में लाया जाता है। यह त्वचा के मृत कोशिकाओं (dead cells) को निकालकर त्वचा में जवाँ निखार लाता है।
  3. चंदन केवल मुंहासों को ठीक करने के काम आता है बल्‍कि इससे कई त्‍वचा रोग जैसे, झाइयां, झुर्रियां, खुजली या फिर त्‍वचा का रंग निखारा जा सकता है।
  4. चिरौंजी का पाउडर, हल्दी, शहदनींबू का रस और गुलाब जस डासकर पेस्ट बना लें। इस पैक के हफ्ते मेम दो बार चेहरे और गर्दन पर लगाने से रंगत मे निखार आता है।
  5. केसर और दही मिला लें। सूखने के बाद धो लें। कुछ ही दिनों में आपकी त्वचा निखर जाएगी।
  6. मसूर की दाल का पाउडर बना लें इसमें नींबू का रस, दूध और अंडे का जर्दी मिला लें। इसका चेहरे पर रोज इस्तेमाल करें।
  7. रात को कुछ बादाम भिगो कर रख दें। सुबह इन्हें पीसकर इसमें शहद मिलाएं। इसे् रो़जाना फैस पर लगाएं।
  8. पानी और फलों के रस सहित तरल पदार्थ पिएं। ये आप की त्वचा को अंदर निखारने में मदद मिलेगी।
  9. चेहरा को साफ़ करने के लिए exfoliating या नरम स्पंज का उपयोग करे क्योकि नुकीले स्पंज त्वचा की परत हानि पहुंचाते है 
  10. टमाटर में बुढ़ापा विरोधी (anti-एजिंग) एंटीऑक्सीडेंट लाइकोपीन का सबसे अच्छा स्रोत हैं। टमाटर के रस का सेवन से त्वचा के रंग में जल्दी निखार आता है
  11. नींबू और शहद एक अच्छा मिश्रण है यह त्वचा के रंग को हल्का करने में मदद करता है नींबू और शहद को बराबर मात्रा में  मिलाएं और 20 मिनट तक छोड़ दें फिर लगाएं
  12. ककड़ी त्वचा की सुंदरता को बढ़ावा देता है। आप ककड़ी तोड़ का पेस्ट चेहरे पर लगाए इसमें वनस्पति के तत्व शामिल होते है जो मेलेनिन कम करने और त्वचा टैन को कम से रखता है
  13. अंडे की जर्दी सबसे अच्छा उपाय है सुस्त, बेजान त्वचा को गोरापन करने के लिए एक कटोरी में अंडे की जर्दीशहद और दही का एक चम्मच मिलाएं। फिर सभी को अच्छी तरह से हिलाये इस फेस पैकको अपने चेहरे पर लगाएं, थोड़ी देर छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो लें। अधिक लाभ के लिए कम से कम दो से तीन महीने के लिएप्रयोग करें
  14. पौष्टिक खाद्य पदार्थ का सेवन करे जैसे की बादाम, पालक, जामुन, सेब, गाजर, अखरोट इनके सेवन से आप की त्वचा नरम और चिकनी रहेगी।
  15. नींबू का रस आपकी त्वचा पर अद्भुत काम कर सकता हैं। आप इसे किसी भी समय लय सकते है और जल्दी परिणाम के लिए कम से कम चार से छह सप्ताह तक प्रयोग करे तो आपकी त्वचा चमक जाएगी

Wednesday, 22 June 2016

सिर दर्द से फटने लगे तो समझो है माइग्रेन

भाग दौड़ भरी इस जिंदगी में सिरदर्द एक आम बीमारी बन गई है। नौकरीपेशा लोग, महिलाएं, बुजुर्ग, बॉस या कर्मचारी, सभी सिरदर्द से परेशान रहते हैं। हालांकि, सिर जब दर्द से फटने को होता है, इसके लिए एक नया शब्द ही प्रचलन में आ गया है, माइग्रेन। कई लोग कहते हैं कि वे माइग्रेन से बहुत परेशान हैं। माइग्रेन यानि सिरदर्द जब असहनीय हो जाए।

 माइग्रेन के लक्षण और कारण - Migraine Symptoms in Hindi


माइग्रेन (Migraine) में सिरदर्द के साथ चक्कहर, उल्टी और थकान की महससू होती है। माइग्रेन की दर्द अमूमन आधे सिर में होता है। सिर दर्द आधे हिस्से से शुरू होकर पूरे सिर को अपनी जकड़ में ले लेता है। यह दर्द लगभग असहनीय होता है। पेट में गैस होने से भी यह सिर दर्द शुरू होता है। या कहें, माइग्रेन का दर्द होने पर पेट में गैस बनकर तबीयत और ज्यादा बिगड़ती है।

माइग्रेन के कारण - Migraine ke Karan in Hindi


भूखे रहने से : भूखे रहना माइग्रेन की इस दर्द का एक मुख्य कारण है। भूखे रहने से पेट में गैस बनती है। इस कारण सिर दर्द शुरू होता है जो धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। जानकारों का कहना है कि सम्यक आहार यानि न कम न ज्यादा, सिर दर्द को दूर रखने में कारगर है।

शोर-शराबे में : शादी-समारोह हो या कोई अन्य फंक्शन, शोर-शराबे से भरा माहौल सिर दर्द या माइग्रेन पीडि़तों के लिए नुकसानदायक है। ऐसे लोगों को समारोहों में बजने वाले  कानफोड़ू संगीत और शोर-शराबे से बचना चाहिए।

माइग्रेन के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार


तनाव से (Tension) : आजकल हर जगह चाहे सरकारी दफ्तर हो या प्राइवेट, काम का दबाव है। और काम के दबाव से होने वाला तनाव भी सिर दर्द को बुलावा है। काम तो हर किसी को करना है लेकिन दबाव से खुद को बचाकर रखना बहुत जरूरी है। वरना यह माइग्रेन बहुत तकलीफदेय साबित होगा।

अनुवांशिक : कई बार देखा गया है कि माइग्रेन (Migraine) से पीडि़त माता-पिता से यह जानलेवा दर्द बतौर अनुवांशिकी बच्चों में चला जाता है। इसमें कोई ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है, लेकिन ऊपर लिखित कारणों से बचकर माइग्रेन के दर्द से खुद को कुछ दूर तो रखा ही जा सकता है।

सफर करने से : अकसर माइग्रेन (Migraine) ग्रस्त लोगों के लिए सफर करना बहुत मुश्किल कार्य होता है। लंबे सफर के दौरान तो इनकी हालत पतली हो जाती है। ऐसे में लंबे सफर से बचें लेकिन ऐसा संभव नहीं। तो जब भी ऐसे सफर निकलें, सिर दर्द की दवाइयां और खाने-पीने का खास ख्याल रखें।