नीम भारतीय पर्यावरण के अनुकूल एक बहुत ही अच्छी वनस्पति है। इसका स्वाद कड़वा होता है पर यह बहुत गुणकारी है। नीम में मौजूद गुणों के चलते इसे भारत में ‘गांव का दवाखाना’भी कहा जाता है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’यानि ‘श्रेष्ठ और कभी खराब न होने वाला’कहा गया है। नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटीज, बैक्टिरिया और वायरस से लडऩे के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लडऩे का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है। आयुर्वेद के आधार-स्तंभ ‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ में नीम को लाख दुखों की एक दवा कहा गया है।
नीम के स्वास्थ्य लाभ और फायदे - Neem ke fayde, labh in Hindi
स्किन इन्फेक्शन या त्वचा रोगों से बचाव:
नीम की पतियों और इसकी छाल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी फंगल तत्व पाए जाते हैं जो आपके शारीर के चर्म रोगों और घावों को रोकने में सहायक होते हैं! इसका सब से बड़ा फायदा ये होता है के आपके त्वचा पे किसी प्रकार का बुरा प्रभाव नहीं डालता! इसे सभी तरह की त्वचा वाले व्यक्ति प्रयोग कर सकते हैं! नीम के पत्तों को पानी में काफी देर तक उबाल कर और नहाने के पानी में मिलाकर नहाने से इस तरह के रोगों से आपको लाभ मिलेगा।
शरीर के जटिल रोगों में नीम का उपयोग:
नीम की छाल का लेप सभी प्रकार के चर्म रोगों दूर करता है। नीम की पत्तियां चबाने से खून साफ होता है और त्वचा कांतिवान होती है। नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर नहाने से त्वचा रोग नहीं होते है। यदि नीम का तेल न हो तो जले हुए या कटे हुए स्थान पर नीम की पत्तियां पीस कर लेप लगा ले, इस से भी काफी लाभ होगा!
घाव, फोड़े-फुंसी, बदगांठ, लू एवं विष उतारने में नीम उपयोगी:
घाव और चर्म रोग बैक्टिरिया से फैलते हैं। नीम अपने बैक्टेरिया रोधी गुणों के कारण राम वाण औषधि का काम करता है। घाव चाहे छोटा हो या बड़ा नीम की पत्तियों के उबले जल से धोने से शीघ्र लाभ होता है। फोड़े-फुंसी और बाल तोड़ में भी नीम पत्तियां पीस कर लगाई जाती हैं। घमोरियां निकलने पर नीम पत्ते के उबले जल से नहाने पर लाभ होता है। बिच्छू तथा मधुमक्खी के काटने पर नीम की पत्तियों का रस, सरसों का तेल और पानी, में पका कर लगाने से विषैले घाव भी ठीक हो जाते हैं। नीम की पत्ती को पीस कर माथे पर लगाने से भी लू का असर कम होता है।
आंख, नाक, कान, बीमारियों में नीम उपयोगी:
आंख में जलन या दर्द हो तो नीम की पत्ती को कनपटी पर बांधने से आराम मिलता है। नीम का तेल गर्म कर एवं थोड़ा ठंडा कर कान में कुछ दिन तक नियमित डालने से बहरा पन दूर होता है। नीम की पत्तियां एवं अजवाइन पीस कर कन पट्टियों पर लेप करने से नकसीर बंद होती है।
वायु, कफ, पित्त, दमा, रक्त, हृदय विकार और पथरी में नीम:
नीम और वक के छाल का काढ़ा वायु, कफ, पित्त, दमा, रक्त और हृदय संबंधी विकार और पथरी में लाभ दायक है। नीम की कोमल पत्तियां, पत्ते, जड़, फूल, फल एवं छाल का काढ़ा इनमें से किसी का भी सेवन करने से फायदा मिलता है। नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला है। नीम की पत्तियों की राख को जल के साथ नियमित रूप से लेने पर पथरी गल कर नष्ट हो जाती है।

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